गोवत्स द्वादशी
“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”
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कार्तिक कृष्ण पक्ष। वत्सपूजा वटश्चैव कर्तव्यी प्रथमऽहनि के अनुसार इसमें प्रदोष व्यापिनी पहले दिन की द्वादशी तिथि लेना चाहिए। सायंकाल में गाय एवं बछड़ों का पूजन करना चाहिए।धनतेरस से एक दिन पहले गोवत्स द्वादशी मनाई जाती है। गोवत्स द्वादशी के दिन गाय और बछड़ों की पूजा की जाती है। पूजा के बाद गेहूं से बने उत्पाद गाय और बछड़ों को खिलाए जाते हैं। जो लोग गोवत्स द्वादशी मनाते हैं वे दिन के दौरान गेहूं और दूध से बने किसी भी उत्पाद को खाने से परहेज करते हैं। गोवत्स द्वादशी को नंदिनी व्रत के रूप में भी मनाया जाता है। नंदिनी हिंदू धर्म में दिव्य गाय है। महाराष्ट्र में गोवत्स द्वादशी को वसु बारस के नाम से जाना जाता है और इसे दीपावली का पहला दिन माना जाता है।
॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष ॥
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संकलनकर्ता –
पंडित हर्षित द्विवेदी
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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