पितृपक्ष (महालय)

“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”
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भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या तक सोलह दिन पितरों का तर्पण एवं विशेष दिन श्राद्ध करने का शास्त्रीय विधान है, इससे पितृ ऋण से मुक्ति मिलती है व घर में सुख-शांति बढ़ती है। श्रुति के अनुसार

पूर्वान्हो वै देवानां मध्यान्हो मनुष्याणमपरान्हः पितृणाम् ।

अर्थात् – अपरान्ह पितरों का समय होता है। इसलिए जिस तिथि को श्राद्ध दिन हो, यदि वह तिथि अपरान्ह व्यापिनी हो तब श्राद्ध करना चाहिए। जैसा कि पहले लिखा जा चुका है कि १८ घटि से २४ घटि के बीच व्याप्त रहने वाली तिथि में उस दिन संबंधित तिथि श्राद्ध होता है। यदि उस दिन १८ घटी से २४ घटी के बीच दो तिथियां व्याप्त हों तो दोनों तिथियों का श्राद्ध उसी दिन करना चाहिए। उदाहरण के लिए किसी दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि है तथा पंचांग में उस तिथि का समाप्तिकाल १८ घटी ३१ पल लिखा है तो सप्तमी अपरान्ह व्यापिनी है तथा अष्टमी भी इसलिए दोनों तिथियों के श्राद्ध एक ही दिन होंगे। अतः उस दिन सप्तमी के साथ-साथ अष्टमी का भी श्राद्ध होगा। सन्यासियों का श्राद्ध द्वादशी को करना चाहिए। युद्ध या दुर्घटना में मृत्यु को प्राप्त का श्राद्ध चतुर्दशी को करना चाहिये। प्रतिपदा श्राद्ध परिवार के उन मृतक सदस्यों के लिए किया जाता है, जिनकी मृत्यु प्रतिपदा तिथि पर हुई हो। इस दिन शुक्ल पक्ष अथवा कृष्ण पक्ष दोनों ही पक्षों की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जा सकता है। प्रतिपदा श्राद्ध तिथि को नाना-नानी का श्राद्ध करने के लिए भी उपयुक्त माना गया है। यदि मातृ पक्ष में श्राद्ध करने के लिए कोई व्यक्ति नहीं है, तो इस तिथि पर श्राद्ध करने से नाना-नानी की आत्मायें प्रसन्न होती हैं। यदि किसी को नाना-नानी की पुण्यतिथि ज्ञात नहीं है, तो भी इस तिथि पर उनका श्राद्ध किया जा सकता है। माना जाता है कि, इस श्राद्ध को करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। प्रतिपदा श्राद्ध को पड़वा श्राद्ध के नाम से भी जाना जाता है।पितृ पक्ष श्राद्ध पार्वण श्राद्ध होते हैं। इन श्राद्धों को सम्पन्न करने के लिए कुतुप, रौहिण आदि मुहूर्त शुभ मुहूर्त माने गये हैं। अपराह्न काल समाप्त होने तक श्राद्ध सम्बन्धी अनुष्ठान सम्पन्न कर लेने चाहिये। श्राद्ध के अन्त में तर्पण किया जाता है।

॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष ॥
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संकलनकर्ता –
पंडित हर्षित द्विवेदी
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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Pandit Harshit Dwivedi Ji Maharaj is a highly educated and simple, true and meaningful Astrology, Vastu Consultant, who is always striving to take Sanatan Vedic Dharma and religious traditions and divine power to the highest pinnacle of progress.

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