रम्भातीज व्रत

“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”
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ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया को जिस दिन पूर्व विद्धा तिथि हो उस दिन यह व्रत किया जाता है। पूर्व विद्धा से तात्पर्य यह है कि जिस दिन सूर्योदय से पहले ही तृतीया प्रारंभ हो चुकी हो। पिछले वार में ही पूर्व वाली तिथि (द्वितीया) का संगम हो।

रंभा तीज का महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार रंभा तीज का नाम स्वर्ग की सबसे खूबसूरत कही जाने वाली अप्सरा रंभा के नाम पर पड़ा है। रंभा स्वर्गलोक की सबसे सुंदर अप्सरा थीं और उनकी उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी। रंभा तीज के दिन रंभा देवी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि जब देवताओं और असुरों के बीच लड़ाई हुई थी, तो समुद्र मंथन हुआ था। समुद्र मंथन में कुल १४ रत्न निकले थे। इन्हीं रत्नों में से एक रंभा थी। इसलिए रंभा को देवलोक में स्थान मिला था।

रंभा तीज की पूजा
रंभा तीज के दिन सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त होने के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं। इस दिन सूर्य देव के लिए दीपक प्रज्जवलित किया जाता है। महिलाएं मां लक्ष्मी की पूजा करती हैं। पूजा में गेंहू, अनाज और फूल शामिल किए जाते हैं। मां लक्ष्मी और माता सीता को प्रसन्न करने के लिए पूरे मनोभाव से पूजा की जाती है। अप्सरा रंभा देवी को इस दिन विशेषकर पूजा जाता है। इस दिन मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा की जाती है।

रम्भा तीज पर मंत्र जाप
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद हाथ में अक्षत लेकर इन मंत्रों का जाप करें।

१• ॐ दिव्यायै नमः।
२• ॐ वागीश्चरायै नमः।
३• ॐ सौंदर्या प्रियायै नमः।
४• ॐ योवन प्रियायै नमः।
५• ॐ सौभाग्दायै नमः।
६• ॐ आरोग्यप्रदायै नमः।
७• ॐ प्राणप्रियायै नमः।
८• ॐ उर्जश्चलायै नमः।
९• ॐ देवाप्रियायै नमः।
१०• ॐ ऐश्वर्याप्रदायै नमः।
११• ॐ धनदायै धनदा रम्भायै नमः।

॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष ॥
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संकलनकर्ता –
श्रद्धेय पंडित विश्वनाथ द्विवेदी ‘वाणी रत्न’
संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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