जन्म कुण्डली में जमींदारी योग
“ॐ हरि हर नमो नमःॐ”
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चतुर्थेश दशम में और दशमेश चतुर्थ में हो। चतुर्थेश दूसरे या ११वें भाव में हो। चतुर्थ स्थान की राशि चर हो और उसका स्वामी भी चर राशि में हो। पंचमेश लग्नेश, तृतीयेश, चतुर्थेश, षष्ठेश, सप्तमेश, नवमेश और द्वादशेश के साथ हो तो जमींदारी के साथ-साथ जातक व्यापार भी करता है। चतुर्थेश, दशमेश और चन्द्रमा बलवान् हों और वे ग्रह परस्पर में मित्र हों तो जातक जमींदार होता है।
॥ श्रीरस्तु ॥
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श्री हरि हरात्मक देवें सदा, मुद मंगलमय हर्ष।
सुखी रहे परिवार संग, अपना भारतवर्ष ॥
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संकलनकर्ता –
श्रद्धेय पंडित विश्वनाथ द्विवेदी ‘वाणी रत्न’
संस्थापक, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
(‘हरि हर हरात्मक’ ज्योतिष संस्थान)
संपर्क सूत्र – 07089434899
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